कुछ समय पहले इ-मेल में एक लतीफा पढ़ा था , जिसमे अध्यापक अपने विद्यार्थियों को गरीब आदमी पर निबंध लिखने को बोलती है। एक छोटी लड़की जो की अमीर परिवार से होती है, निबंध कुछ इस तरह लिखती है - गरीब वो होता है, जिसका ड्राईवर गरीब हो, जिसकी आया गरीब हो, जिसका माली भी गरीब हो, जिसके पास २ BMW, 2 Merc, 2 Porsche की जगह ये गाड़ियाँ सिर्फ १-१ ही हो।
इसी को सोचकर मेरे दिमाग ने सोचा कि सिर्फ वो आदमी ही गरीब क्यों है? एक इंसान (पढ़े योगेश) जिसकी तनख्वाह ४० हज़ार से कम है और उसके ऊपर ३ क्रेडिट कार्ड के बिल हैं जिनका कुल योग 34 हज़ार है, उसके ऊपर दोस्तों से लिए गए उधार के 20 हज़ार बकाया है, घर का किराया और अन्य घर खर्च मिलाकर 15 हज़ार हैं। और इन सबसे बढ़कर उसने अपने भूतकाल में जो भविष्य को सुखद बनाने के लिए पोलिसियाँ ली थीं उनके 18 हज़ार भी तो देने हैं। इस बेचारे आदमी को गरीब न कहे तो क्या कहे।( ध्यान रहे इन सब खर्चो में रोज़ मर्रा के होने वाले खर्च शामिल नहीं किये गए हैं, जैसे कि चलचित्र देखना, पेट्रोल खर्च, दूरभाष पर होने वाला खर्च इत्यादि) और दुनिया बोलती है IT अभियंता बहुत अमीर होते हैं।
कोई है जो इसे गरीबी रेखा से नीचे जीने वाला प्रमाण पत्र दिलवा दे ? नहीं तो कोई दयावान आकर अपनी दया कि कुछ मुद्रा इसके ऊपर लुटा दे ?
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Tuesday, January 5, 2010
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