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Friday, March 13, 2009

गेंद बल्ले का खेल, चुनाव और आक्रान्ता ! !

भारतीय मुख्य संघ -2 (IPL- इंडियन प्रीमिएर लीग) की घोषणा हुई और कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान में श्री लंका के खिलाडियों पर आक्रान्ताओं ने आक्रमण कर दिया। यह ही काफ़ी नही था उसके कुछ दिनों बाद भारत के आम चुनाव की तारीखे भी आ गई। वैसे ही खिलाडियों की सुरक्षा की समीक्षा हो रही थी और चुनाव की घोषणा से नगर पाल दल (पुलिस) और सेना की नींद हराम होने वाली है। अब भा.मु .स. के मुख्य निष्पादन अधिकारी ललित मोदी ने आनन् फानन में बोल दिया की तारीखे नही बदलेगी बस सूची में कुछ परिवर्तन होगा, लेकिन अभी तक वो कुछ तय नही कर पाए हैं।
एक तरफ़ आतंकवादियों से खिलाडियों को खतरा है तो दूसरी तरफ़ चुनाव भी समय पर करवाने हैं, और दोनों के लिए सैन्य दल की आवश्यकता पड़ेगी। इसका हल शायद श्री ललित मोदी जी कुछ इस तरीके से भी निकाल सकते हैं।
खिलाडियों की पौशाक में बदलाव होगा।
"लोहे का टोप", "कवच नुमा वर्दी (गोली भेदी)", गले, कोहनी, घुटने और सीने को ढकने के लिए अलग से अभेद बचाव।
रात में आराम से देखने के लिए रात्री दृष्टि वाले ऐनक।
लोहे के टोप में श्रंगिका (एंटिना) भी लगा होना चाहिए जो की केंद्रीय सुरक्षा प्रणाली से जुडा होगा, जिससे खतरे का आभास होते ही सूचना तुंरत खिलाड़ी तक पहुँच जायेगी।
अन्तिम किंतु सूक्ष्म नही (last but not the least)-
हर्षित करने वाली बालाएं इस खेल का अभिन्न अंग हैं उन्हें इससे अलग नही रखा जा सकता, लेकिन हर्षित करने वाली बालाओं (चीयर लीडर्स ) पर उपरोक्त नियम लागू नही हो सकते ;-) तो उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें बन्दूक (sniffer rifle) दी जानी चाहिए।